ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन कानून 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों के साथ केंद्र को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते में जवाब मांगा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को साफ किया कि इस मामले की सुनवाई तीन जजों की पीठ करेगी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की मान्यता, अधिकारों और संरक्षण को नियंत्रित करने वाले विभिन्न प्रविधानों में किए गए संशोधनों को चुनौती दी गई है। यह याचिका ट्रांसजेंडर पर्सन परिषद के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और जैनब जाविद पटेल की ओर से दाखिल की गई है। ट्रांसजेंडर संशोधन कानून को बीते 31 मार्च को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी
यह कानून इस बात को पुनर्परिभाषित करता है कि किसे ट्रांसजेंडर व्यक्ति माना जाएगा, साथ ही यह जबरन पहचान परिवर्तन और शारीरिक नुकसान जैसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए दंडात्मक प्रविधानों को भी मजबूत करता है। हालांकि संशोधित कानून को लेकर विपक्षी दल व एलजीबीटीक्यू समूह सवाल उठा रहे हैं।