दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET के चलते टेलीग्राम पर अस्थाई रूप से बैन लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा है। जस्टिस तेजस करिया की सिंगल बेंच ने टेलीग्राम की याचिका खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार का आदेश सही आधार पर है और IT एक्ट की धारा 69A के तहत किसी प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया जा सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने आगे कहा कि तत्काल कार्रवाई करना ज़रूरी था। IT एक्ट के सेक्शन 69A के तहत सरकार किसी प्लेटफार्म को ब्लॉक करने का फैसला ले सकती है। बैन लगाने के पीछे सरकार की ओर से दिए गए कारण पर्याप्त और उचित है। सरकार ने आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत निर्धारित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन किया और ऐसा नहीं कहा जा सकता कि अधिकारियों ने बिना सोच-विचार के फैसला लिया था।
दरअसल, टेलीग्राम ने दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें नीट परीक्षा के चलते केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को 22 जून तक अस्थाई रूप से बैन करने का फैसला लिया था। गुरुवार को करीब 2 घंटे की लंबी सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कल सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम नया डार्क वेब बनता जा रहा है, जो अपराधियों को जोड़ रहा है और उनकी अवैध गतिविधियों को सक्षम बना रहा है, केंद्र सरकार ने आगे कहा था कि टेलीग्राम नया डार्क वेब बन गया है, जो अपराधियों को आपस में जोड़ता है। अपराधियों ने तेजी से टेलीग्राम को अपना लिया है और डीप वेब लिंक के माध्यम से डार्क वेब फोरम से जुड़ने वाले चैनलों पर लिंक पोस्ट कर रहे हैं, जिससे अधिकारियों के लिए अपराधियों को ट्रैक करना और उन पर कार्रवाई करना मुश्किल हो गया है।
गुरुवार को ही केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर बैन लगाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में अपना हलफ़नामा भी दाखिल किया था।केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को NEET-UG 2026 का पेपर लीक होने के मामले में टेलीग्राम के गलत इस्तेमाल के बारे में कई शिकायतें मिली थीं। हलफ़नामे के मुताबिक NTA ने ऐसे कई टेलीग्राम चैनलों, ग्रुप्स और बॉट्स की पहचान की, जो कथित तौर पर लीक हुए परीक्षा के मटीरियल को फैलाने और NEET परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल थे। हलफ़नामे में कहा गया था कि अधिकारियों ने शुरू में सबसे कम पाबंदी वाला तरीका अपनाया और तुरंत टेलीग्राम को ब्लॉक नहीं किया। इसके बजाय अधिकारियों ने 3 जून, 2026 को टेलीग्राम के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया। बैठक के दौरान सरकार ने चिंता जताई गई थी कि टेलीग्राम लीक हुए परीक्षा के पेपर फैलाने वाले चैनलों की पहचान करने और उन्हें रोकने में सक्रिय रूप से नाकाम रहा है।