सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की तीन निजी बिजली वितरण कंपनियों के CAG ऑडिट कराने के दिल्ली सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। दरअसल, गुरुवार को ही दिल्ली सरकार ने ऑडिट का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय लेखा परीक्षक की नियुक्ति के संबंध में दिल्ली विद्युत नियामक आयोग के निर्णय की वैधता पर सवाल उठता है और इसकी जांच आवश्यक है, इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति के लिए एपीटीईएल के निर्देश पर भी रोक लगा दी है।
जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगले आदेश तक लेखापरीक्षा के लिए किसी भी चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति पर APTEL के निर्देश पर रोक रहेगी। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान दीवानी अपील सीधे तौर पर इस मुद्दे से संबंधित है कि CAG द्वारा वितरण कंपनियों के ऑडिट की प्रक्रिया शुरू करने में डीईआरसी की कार्रवाई कानूनी रूप से अनुमेय है या नहीं। दरअसल, विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के अप्रैल के फैसले के खिलाफ DERC की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है।
याचिका में कहा गया था कि सीएजी को लेखापरीक्षा सौंपना वैधानिक ढांचे के विपरीत है, साथ ही इसके बजाय नियामक को एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था ताकि वह एक सख्त लेखापरीक्षा कर सके। DERC की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।