दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जिस तरह से यह पूरी घटना हुई उसने समाज को सोचने पर मजबूर किया। जज ने कहा कि अपराध को अंजाम देने का तरीका अत्यंत क्रूर था।
जज ने कहा कि हमला इतना भीषण और निर्मम था कि पीड़ित की मौत के बाद भी उसका शव दोषियों ने घसीटकर चांद बाग ले गए और उसे नाले में फेंक दिया और शव को जानवर की तरह छोड़ दिया गया।जज ने कहा कि हम इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर तो मान रहे हैं, लेकिन इन दोषियों का जीवित रहना समाज के लिए खतरा नहीं है और इनके सुधारने की गुंजाइश अभी बाकी है। ऐसे हम फांसी जगह उमर कैद सजा सुना रहे हैं।
वहीं दोषी संगे भाई नाजिम और काजिम के वकील अब्दुल गफ्फार ने कहा कि कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि दोषियों ने कोई और एक्ट किया हो, जैसे चाकू से वार करना या कोई वेपन का इस्तेमाल किया हो, कोर्ट ने धारा 149 के तहत दोषी ठहराया है। वकील अब्दुल गफ्फार ने कहा कि हम ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर करेंगे।