दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि अगर सेम-सेक्स पार्टनर रिश्ते में रह सकते हैं, तो उन्हें एक-दूसरे के लिए मेडिकल सहमति देने का विकल्प क्यों नहीं दिया जा सकता? मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर सेम-सेक्स पार्टनर को रिश्ते में रहने और साथ रहने का अधिकार है, तो उन्हें एक-दूसरे के लिए मेडिकल सहमति देने के विकल्प से क्यों वंचित किया जाना चाहिए।
दरअसल, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वे केंद्र सरकार से सवाल कर रही थीं कि एक साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने उस याचिका का जवाब क्यों नहीं दिया, जिसमें मरीज के नॉन-हेटरोसेक्सुअल पार्टनर को उनका मेडिकल प्रतिनिधि मानने और मेडिकल स्थितियों में सहमति देने के लिए गाइडलाइंस बनाने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह एक अहम मामला है, इसलिए इस पर अगले महीने ही फ़ैसला किया जाएगा, हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक हफ़्ते के अंदर जवाबी हलफ़नामा दाखिल करने का निर्देश दिया।