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Legal Beat > News > High Court > दिल्ली कोचिंग सेंटर हादसे पर HC की दिल्ली सरकार को फटकार; MCD कमिश्नर, DCP और जांच अधिकारी को सभी फाइलों के साथ किया तलब
High Court

दिल्ली कोचिंग सेंटर हादसे पर HC की दिल्ली सरकार को फटकार; MCD कमिश्नर, DCP और जांच अधिकारी को सभी फाइलों के साथ किया तलब

Sapna
Last updated: July 31, 2024 1:59 pm
Sapna
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दिल्ली के ओल्ड राजेन्द्र नगर कोचिंग में तीन छात्रों की मौत से जुड़े मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि MCD कल तक हलफनामा दाखिल कर उठाए गए कदम के बारे में बताए। हाई कोर्ट ने MCD कमिश्नर, जिले के DCP और जांच अधिकारी को सभी फाइलों के साथ अगली सुनवाई पर कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी पक्षकारों से कल तक जवाब दाखिल करने को भी कहा है। इसके अलावा राजेंद्र नगर के सभी अतिक्रमणों को शुक्रवार तक हटाने का भी आदेश दिया। दिल्ली हाई कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त को तय कर दी।

Contents
दिल्ली में लोग आग और पानी से मर जा रहे हैं: याचिकाकर्ताउच्च स्तरीय जांच की जरूरत: याचिकाकर्ताकरीब 75 संस्थानों को नोटिस, 35 बंद और 25 सील किए गए: दिल्ली सरकारदिल्ली सरकार के सिविक अधिकारी दिवालिया हैं: HCदिल्ली का इंफ्रा स्ट्रक्चर कैसे अपग्रेड करेंगे?: HCMCD के वरिष्ठ अधिकारियों को AC दफ्तर से बाहर निकलने की जरूरत: HCदिल्ली में बिल्कुल अस्तव्यस्त और अराजक की स्थिति: HCजांच सही नहीं होने पर हम CBI को सौंप सकते हैं मामला: HC

दिल्ली में लोग आग और पानी से मर जा रहे हैं: याचिकाकर्ता

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि राजेंद्र नगर में जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि 2019 में होटल में आग लगने से एक IRS, एक विदेशी की मौत हो गई थी। वही कुछ महीने पहले मुखर्जी नगर की कोचिंग में आग की घटना और नर्सिंग होम में लगी आग की घटना भी हुई। हम ऐसी जगह रह रहे है जहां लोग आग और पानी से मर जा रहे है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि साल 2023 में अदलात ने MCD और अन्य स्थानीय अधिकारियों को निर्देश भी जारी किया था लेकिन एक साल बीत गया लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि इस साल 26 जून को राव IAS के अवैध संचालन के संबंध में प्रशासन को एक पत्र भेजा गया था, लेकिन उसपर भी कोई कदम नहीं उठाया गया। अगर समय पर कार्रवाई की गई होती तो उन तीन लोगों की जान बचाई जा सकती थी। रिहायशी इलाकों में बेसमेंट में कई लाइब्रेरी चल रही हैं लेकिन पता नहीं क्यों MCD शांत है?, कई मौजूदा कमिश्नरों की वहां संपत्ति है जो एक कड़वा सच है।

उच्च स्तरीय जांच की जरूरत: याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता ने कहा कि इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है कि अखिर किस चीज़ ने अधिकारियों को कार्रवाई करने से रोका?। वहीं 2023 मे पटेल नगर में एक युवक की करंट लगने से मौत होने पर दाखिल याचिका पर अभी तक कोई जवाब नहीं दाखिल किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि दिल्ली के पटेल नगर, करोल बाग, राजेंद्र नगर में बहुत सी बहुमंजिला इमारतें हैं। एक इमारत में करीब 50-60 छात्र रह रहे हैं। यहां तक ​​कि बेसमेंट में भी छात्रों के PG चल रहे हैं। सरकार ने प्रत्येक क्षेत्र में अवैध निर्माण को रोकने के लिए MCD की ओर से व्यक्ति नियुक्त हैं, लेकिन वे काम नहीं कर रहे हैं। MCD फायर डिपार्टमेंट जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहा है। जिला स्तर के अधिकारी को जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए।

करीब 75 संस्थानों को नोटिस, 35 बंद और 25 सील किए गए: दिल्ली सरकार

वहीं दिल्ली सरकार ने कहा कि इमारतों की प्रकृति के कारण कोचिंग सेंटरों के लिए अनुमतियां दी गई थीं। भंडारण के लिए बेसमेंट का उपयोग किया जा सकता है और निरीक्षण के बाद अग्निशमन सेवा की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं। करीब 75 संस्थानों को नोटिस जारी किए गए। 35 बंद कर दिए गए और 25 को सील कर दिया गया। फ़िलहाल हम किसी बात को उचित नहीं ठहरा रहा हूं लेकिन जो स्थिति है वह की कार्रवाई की जा रही है। हाई कोर्ट पूछा कि सवाल यह है कि ऐसी घटना आखिर क्यों हुई?। दिल्ली सरकार ने घटना से पहले की परिस्थितियों के बारे में बताते हुए कहा कि निरीक्षण की फाइलें तुरंत अधिकारियों को भेज दी गई थीं।

दिल्ली सरकार के सिविक अधिकारी दिवालिया हैं: HC

हाई कोर्ट ने पूछा कि जब आप उपनियमों को सरल बना रहे थे, तो आपने पुराने बुनियादी ढांचे को पहले ही अपग्रेड क्यों नहीं किया?। इस शहर की बुनियादी संरचना और वर्तमान जरूरतों के बीच बहुत बड़ा अंतर है। आप बहुमंजिला इमारतों की अनुमति दे रहे हैं, लेकिन नाली का कोई उचित निकास नहीं है आपने सीवेज को स्टॉर्म वाटर ड्रेन के साथ मिला दिया, जिससे पानी का बहाव उल्टा हो जाता है। हाई कोर्ट ने कहा कि आपकी सिविक अधिकारी दिवालिया हैं अगर आपके पास वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, तो आप इन्फ्रा कैसे अपग्रेड करेंगे?। हाई कोर्ट ने कहा कि आप फ्रीबी कल्चर चाहते हैं। आप कोई पैसा इकट्ठा नहीं कर रहे हैं।इसलिए आप कोई पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि आपको पहले अपने बुनियादी ढांचे को बढ़ाना होगा और फिर बिल्डिंग के बायलॉज को नरम बनाना होगा और आप उल्टा ही कर रहे हैं।

दिल्ली का इंफ्रा स्ट्रक्चर कैसे अपग्रेड करेंगे?: HC

कोर्ट ने पूछा कि आप इस शहर को कैसे चलाने की योजना बना रहे हैं?। जब आप पांच करोड़ से अधिक की राशि मंजूर ही नहीं कर सकते?, जब हम MCD से परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कहते हैं। उनका कहना है कि पांच करोड़ रुपये से ऊपर की कोई भी परियोजना स्थायी समिति द्वारा अनुमोदित की जाएगी, लेकिन कोई कमेटी नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि कल एक मामले मे कहा गया कि एक योजना को कैबिनेट में अप्रूवल के लिए जाना है.लेकिन कैनिनेट मीटिंग की अगली तारीख क्या है कोई नहीं जानता। हाई कोर्ट ने पूछा और दिल्ली पुलिस कहां है?, मामले की जांच कौन कर रहा है? अखिर वहां इतना पानी कैसे जमा हो गया?। सरकारी वकील ने कहा कि 35 केंद्र बंद कर दिए गए हैं बाकी हम निरीक्षण कर रहे हैं। इसपर हाई कोर्ट ने कहा कि आप हर केंद्र के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन MCD के अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

MCD के वरिष्ठ अधिकारियों को AC दफ्तर से बाहर निकलने की जरूरत: HC

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि कभी-कभी वरिष्ठ अधिकारियों को दौरा करने जाना चहिए है लेकिन वह अपना AC ऑफिस ही नहीं छोड़ रहे हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर आप सोचते हैं कि इमारतों के ज़रिए आप प्रकृति से लड़ सकते हैं, तो आप गलत हैं और यह कैसी योजना है?। एक दिन आप सूखे की शिकायत करते हैं और अगले दिन बाढ़ आ जाती है?। सरकार के वकील ने हाई कोर्ट को बताया कि कुछ नगर निगम अधिकारियों को उनकी चूक के कारण बर्खास्त कर दिया गया। फिर कोर्ट ने दोबारा पूछा कि आपने जूनियर अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है लेकिन उस वरिष्ठ अधिकारी का क्या हुआ जिसे निगरानी करनी चाहिए थी?

दिल्ली में बिल्कुल अस्तव्यस्त और अराजक की स्थिति: HC

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि आपको इस फ्रीबीज पर फैसला लेना होगा। इस शहर में 3.3 करोड़ लोगों की आबादी है जबकि इसकी योजना 6-7 लाख लोगों के लिए बनाई गई थी। हाई कोर्ट ने कहा कि बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किए बिना आप इतने सारे लोगों को समायोजित करने की योजना कैसे बनाते हैं। आज अगर किसी MCD अधिकारी से नालों की योजना बनाने के लिए कहेंगे तो वह ऐसा नहीं कर पाएंगे। उन्हें ही नहीं पता कि नालियां कहां हैं? सब कुछ मिला-जुला है। य़ह बिल्कुल अस्तव्यस्त और अराजक स्थिति है। हाई कोर्ट ने कहा कि आपके पास इतने प्राधिकारण है कि किसी पर दोष न लगे मुखर्जी नगर पर कई आदेश हैं लेकिन उन पर अमल नहीं हो रहा है। यह एक ऐसी रणनीति है जहां किसी भी व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता है। हमें यह पता लगाना होगा कि एक प्राधिकारी का अधिकार क्षेत्र कहां समाप्त होता है और दूसरे प्राधिकारी की जिम्मेदारी कहां से शुरू होती है?।

जांच सही नहीं होने पर हम CBI को सौंप सकते हैं मामला: HC

हाई कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने अपनी जांच सही से नहीं किया तो हम केंद्रीय जांच एजेंसी को मामले की जांच सौप देंगे? हम समझते हैं कि सभी हितधारक जिम्मेदार हैं। हम सभी शहर का हिस्सा हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा हम इस मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए आदेश पारित करेंगे। हाई कोर्ट ने कहा कि दुर्भाग्य से बहुत से अधिकारी परस्पर विरोधी उद्देश्यों के लिए काम कर रहे हैं। बहुत ज़्यादा दोषारोपण हो रहा है। दिल्ली के पूरे प्रशासनिक ढांचे की फिर से जांच की जानी चाहिए, यह इंफ्रास्ट्रक्चरल ब्रेकडाउन है। सरकारी वकील ने कहा कि मामले में हमने विभाग ने जवाब मांगा है। इसपर हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा हो सकता है लेकिन वे प्रशासनिक अव्यवस्था का ख्याल कैसे रखेंगे?। दिल्ली हाईकोर्ट ने फटकार लगते हुए दिल्ली पुलिस और MCD ने अभी तक क्या किया? हाई कोर्ट ने कहा कि घटना के लिए जिम्मेदार बताते हुए आपने सड़क पर गाड़ी चलाने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। MCD के कितने अधिकारी गिरफ्तार हुए?। इस मामले में तुरंत जिम्मेदारी तय की जाए।

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