इंदौर के चर्चित हनीमून मर्डर केस में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले की मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को कोर्ट ने जमानत दे दी है। करीब 11 महीने जेल में बिताने के बाद उसे राहत मिली है। यह वही सनसनीखेज मामला है जिसने रिश्तों, भरोसे और साजिश को लेकर पूरे देश में चर्चा छेड़ दी थी।दरअसल, इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। इस केस ने सबको इसलिए चौंका दिया था क्योंकि हत्या की साजिश में उनकी ही पत्नी सोनम रघुवंशी का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सोनम ने अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर इस हत्या की योजना बनाई थी।घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सोनम को गिरफ्तार कर लिया था और तब से वह जेल में थी। वहीं उसका कथित साथी राज फिलहाल शिलॉन्ग की जेल में बंद है। इस केस ने अपनी संवेदनशीलता और रिश्तों के एंगल की वजह से देशभर का ध्यान खींचा।अब कोर्ट ने सुनवाई के बाद सोनम को जमानत दे दी है, जिसे इस केस में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया है कि जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि आरोप खत्म हो गए हैं—मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी।
कोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत?
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को यह ठीक से नहीं बताया गया कि उसे किन-किन आरोपों में पकड़ा गया है। यानी गिरफ्तारी के कारण साफ और स्पष्ट तरीके से नहीं बताए गए, जो एक गंभीर प्रक्रिया संबंधी कमी है।
कोर्ट ने यह भी पाया कि केस से जुड़े कई दस्तावेज—जैसे गिरफ्तारी मेमो, चेकलिस्ट और केस डायरी—में भी यही खामी थी। खास तौर पर एक धारा (BNS 103(1)) के बारे में आरोपी को कहीं भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।कोर्ट के मुताबिक, इस वजह से आरोपी को अपने बचाव में नुकसान हो सकता था, क्योंकि उसे पूरी तरह पता ही नहीं था कि उस पर क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं। साथ ही रिकॉर्ड में यह भी साफ नहीं था कि जब उसे पहली बार कोर्ट में पेश किया गया, तब उसके पास कोई वकील मौजूद था या नहीं।
जमानत के साथ लगीं ये शर्तें, कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को कुछ सख्त शर्तों के साथ जमानत दी:
- वह सबूतों या गवाहों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगी और फरार नहीं होगी।
- हर सुनवाई की तारीख पर कोर्ट में हाजिर होना होगा।
- बिना अनुमति कोर्ट के क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेगी।
- 50,000 रुपये का निजी बॉन्ड और उतनी ही राशि के दो जमानतदार देने होंगे।
कोर्ट ने क्या कहा जांच की कमियों पर?
कोर्ट ने साफ कहा कि यह सिर्फ छोटी-मोटी गलती नहीं है,बल्कि एक गंभीर चूक है क्योंकि सभी दस्तावेजों में एक जैसी कमी पाई गई। गिरफ्तारी के कारण बताने वाले फॉर्म में भी जरूरी तथ्य साफ तौर पर दर्ज नहीं थे।हालांकि, दूसरी तरफ यह दलील भी दी गई कि सिर्फ प्रक्रिया में हुई गलती के आधार पर जमानत देना सही नहीं है, खासकर जब मामला हत्या जैसा गंभीर हो। लेकिन कोर्ट ने इस मामले के खास हालात को देखते हुए आरोपी को राहत देना उचित समझा।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरे मामलों के उदाहरण यहां सीधे लागू नहीं होते, क्योंकि उनमें गिरफ्तारी के समय आरोपों की जानकारी सही तरीके से दी गई थी।