सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट और निचली अदालतों को ज़मानत की शर्तों के लिए फटकार लगाई है।दरअसल, ओडिशा हाई कोर्ट और निचली अदालतों ने पिछले कुछ आदेश में जमानत की शर्तों के रूप में आदिवासी और दलित समुदाय के लोगों को दो महीने तक पुलिस स्टेशन साफ करने का निर्देश दिया था।
मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि हम बहुत निराश और दुखी हैं कि इस तरह की शर्त बेहद क्रूर और घिनौनी हैं और इंसान की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन शर्तो ऐसा लग सकता है कि न्यायपालिका जाति के आधार पर काम कर रही है क्योंकि समाज के वंचित तबके के लिए ही ऐसी शर्त लगाई गई है।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि 2026 में हम न्यायपालिका से ऐसी उम्मीद नहीं रखते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट और निचली अदालतों की ओर से लगाई गई इन शर्तों को रद्द कर दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने देश की अदालतों को चेतावनी दी कि आगे से ऐसी शर्तें ना लगाई जाए।