SC/ST एक्ट के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामान्य वर्ग की महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। दरअसल, यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील भूपेंद्र सिंह ने दायर की है। याचिका में सामान्य वर्ग की महिलाओं की मनमानी गिरफ्तारियों और हिरासत संबंधी कार्रवाइयों से बचाने के लिए उचित और बाध्यकारी दिशा-निर्देशों की मांग की गई है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3) और 21 का हवाला देते हुए कहा गया है कि जनरल कैटेगरी की महिलाओं के खिलाफ SC/ST एक्ट का बिना किसी जांच-पड़ताल के स्वचालित रूप से हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और साथ ही सामान्य वर्ग की महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही घरेलू हिंसा, दहेज के लिए उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न और आर्थिक निर्भरता जैसी संरचनात्मक समस्याओं का शिकार है।
याचिका में आगे कहा गया है कि जब ऐसी अत्यंत असुरक्षित महिलाओं पर SC/ST एक्ट के कठोर और गैर-जमानती प्रावधानों के तहत जवाबी या प्रतिशोधात्मक शिकायतें दर्ज की जाती हैं, तो यह उन पर एक विनाशकारी दोहरी मार की तरह होता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि SC/ST धारा 18A को कानून में शामिल कर सरकार ने इन महिलाओं को मनमानी गिरफ्तारियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साइबर-ब्लैकमेलरों द्वारा की जाने वाली जबरन वसूली के सामने पूरी तरह से असुरक्षित छोड़ दिया है। याचिका में DU की रुचि तिवारी मामले का भी उदाहरण दिया गया है।