सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एसिड अटैक पीड़ितों पर विकलांगता कानून लागू करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कानून के तहत अनुसूची में संशोधन करने को कहा, ताकि परिभाषा का विस्तार करने के लिए उसके द्वारा आदेशित परिवर्तन को शामिल किया जा सके। अनुच्छेद 142 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 2016 के कानून के तहत “एसिड अटैक पीड़ितों” में वे लोग भी शामिल होंगे, जिन्हें एसिड लगने से आंतरिक चोटें आई हैं, भले ही कोई दृश्य विकृति न हो। केंद्र सरकार ने भी कहा कि वो अनुसूची में संशोधन करेगा।
CJI सूर्य कांत ने केंद्र सरकार को सजा में पर्याप्त वृद्धि करने और आरोपी पर सबूत का बोझ डालने पर विचार करने का सुझाव देते हुए कहा कि पीड़ित को तुरंत सबूत पेश करने की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाना चाहिए। वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि 10-15 साल की सजा, सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की बिक्री का मुद्दा भी उठाया था, इसे पान की तरह खरीदा जा सकता है, कोई भी जाकर खरीद सकता है। CJI ने कहा कि कुछ किया जाना चाहिए। CJI ने पीड़ित को मुआवजा देने के लिए आरोपी की संपत्ति को जब्त करने का भी सुझाव दिया। CJI ने कहा कि एसिड बिक्री पर नियंत्रण होना चाहिए और अगर विक्रेता दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए, उन पर भी परोक्ष आपराधिक दायित्व लागू होना चाहिए।
वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि यह भी देखना होगा कि लोगों को बेचने का लाइसेंस कैसे दिया जाता है। CJI ने कहा कि जब तक कानून अनुमति देता है, हमारा रवैया बेहद सख्त होना चाहिए। एक पक्षकार ने कहा कि दिल्ली में अभी भी तेजाब बिक रहा है, बिल्कुल भी अमल नहीं हो रहा है, गलियों में आवाज देकर बेचा जाता है। CJI सूर्य कांत ने कहा कि इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।