सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन के महाकाल मंदिर के गर्भगृह में सभी भक्तों को दर्शन, पूजा और जलाभिषेक के समान अधिकार की मांग के साथ VIP दर्शन के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई ने सुनवाई से इंकार किया। दरअसल, वकील विष्णु शंकर जैन के ज़रिए दाखिल इस याचिका में कहा गया था कि मंदिर की प्रशासनिक समिति VIP भक्तों को पूजा के लिए अनुमति दे रही है जबकि सामान्य भक्तों को 2023 से ही इसकी इजाज़त नहीं है। समिती को इस तरह के भेदभाव की इजाजत नहीं दी जा सकती, उन्होंने मांग की कि गर्भगृह में पूजा के लिए एक समान नीति होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गर्भगृह में कौन जाएगा या नहीं, इसको लेकर कोर्ट निर्देश नहीं दे सकता। यह तय करना मंदिर की प्रशासनिक समिति का काम है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं दायर करने वाले लोग सच्चे श्रद्धालु नहीं होते, श्रद्धा के पात्र नहीं हैं, हम इस पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
CJI ने आगे कहा कि ये लोग अलग-अलग उद्देश्यों से आते हैं, क्या सही है और क्या गलत, यह तय करना अदालत का काम नहीं है। हम न्यायसंगतता पर ध्यान देते हैं। कोर्ट को ऐसे विषयों पर दिशानिर्देश या नीतियां तय करने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ली। कोर्ट ने इस बात की इजाज़त दी कि वो इसको लेकर मंदिर की प्रशासनिक समिति के सामने ज्ञापन दे सकते है।