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Legal Beat > News > Supreme Court > NEET-UG परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट का IIT दिल्ली निदेशक को निर्देश; एक सवाल का सही जवाब तय करने के लिए तीन सदस्यीय एक्सपर्ट बोर्ड बनाने का निर्देश
Supreme Court

NEET-UG परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट का IIT दिल्ली निदेशक को निर्देश; एक सवाल का सही जवाब तय करने के लिए तीन सदस्यीय एक्सपर्ट बोर्ड बनाने का निर्देश

Sapna
Last updated: July 22, 2024 6:51 pm
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NEET-UG परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा में एक सवाल का सही जवाब तय करने के लिए IIT दिल्ली निदेशक को तीन सदस्यीय एक्सपर्ट बोर्ड बनाने का निर्देश दिया है। बोर्ड मीटिंग कर कल दोपहर 12 बजे तक कोर्ट को सही उत्तर की जानकारी देंगे। दरअसल, NCERT के पुराने सिलेब्स के हिसाब से एक उत्तर ठीक था जबकि NCERT के नए सिलेबस के हिसाब से दूसरा विकल्प। NTA ने इस सवाल के दो अलग अलग विकल्पों को सही मानकर NEET में नंबर दिए गए थे। कुछ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस आपत्ति जाहिर की है। कल इस मामले में IIT का जवाब आने के बाद कोर्ट सुनवाई करेगा। कल SG तुषार मेहता NTA और केंद्र सरकार की ओर से दलीलें रखेंगे।

Contents
पेपर लीक के पीछे एक संगठित गिरोह: याचिकाकर्ताआरोपियों के बयानों से संकेत मिलते है कि पेपर लीक 4 मई से पहले हुआ था: CJIहमें ऑल इंडिया डेटा के बारे में बताइए: CJIव्यापक पेपर लीक के सबूत नहीं: CJIजब SBI से पेपर आने थे, तो केनरा बैंक से पेपर कैसे आए?: CJIअभ्यार्थियों को ग्रेस मार्क्स क्यों दिया गया?: CJIप्रश्नपत्र छह घंटे तक अपने पास रखे गए: याचिकाकर्तापरीक्षा में 61 टॉपर निकले इसपर भरोसा नहीं किया जा सकता: याचिकाकर्ता

पेपर लीक के पीछे एक संगठित गिरोह: याचिकाकर्ता

वहीं याचिकाकर्ताओं के वकील नरेंद्र हुड्डा ने आज अपना पक्ष रखा। आज सुनवाई शुरू होते ही वरिष्ट वकील नरेंद्र हुड्डा ने बिहार पेपर लीक की रिपोर्ट पर दलील देते हुए कहा कि पेपर लीक कराना एक संगठित गिरोह का काम है, जो पहले भी ऐसे मामलों में काम कर चुका है, बिहार पुलिस को कोर्ट ने खुद कहा है कि सभी बरामद सामग्री, केस डायरी, रिपोर्ट आदि सहित सभी सामग्रियां पेश की जाएं। हुड्डा ने कहा कि हकीकत य़ह है कि पेपर तीन मई या उससे पहले लीक हुआ। NTA ने जो पांच मई को पेपर लीक की बात कह रहा है। उसमें सच्चाई नहीं है। य़ह किसी निचले स्तर का काम नहीं है बल्कि इसके पीछे पूरा गैंग शामिल है। संजीव मुखिया और बाकी लोग गिरफ्तार नहीं हुए है।

आरोपियों के बयानों से संकेत मिलते है कि पेपर लीक 4 मई से पहले हुआ था: CJI

CJI ने बिहार पुलिस द्वारा CrPC 161 के तहत बयान की जानकारी मांगी। इसपर ने बताया कि चार मई को पहला बयान अनुराग यादव का दर्ज हुआ। उसके बाद नीतीश कुमार का बयान दर्ज हुआ। इसमें दो और लोग अमित आनंद और सिकंदर प्रसाद ने बिहार पुलिस के सामने बयान दर्ज कराया है। याचिकाकर्ताओं के वकील नरेंद्र हड्डा ने कहा कि बिहार पुलिस के सामने CrPC 161 के तहत दर्ज इन चारों के बयानों से साफ है कि पेपर लीक पांच मई को परीक्षा होने से बहुत पहले ही हो गया था।वही SG तुषार मेहता ने EOU की रिपोर्ट के बारे मे बताते हुए कहा अमित आनंद मिडिलमैन है। वह चार मई की रात को छात्रो को इकट्ठा कर रहा था। नीतीश कुमार मौके पर मौजूद था, जहाँ पेपर सुबह मिला और छात्रो को उत्तर याद कराया गया। CJI ने कहा कि आरोपियों के बयानों के आधार पर य़ह लगता है की पेपर 5 मई से पहले लीक हुआ था?। इसपर SG ने कहा कि EOU ने अमित आनंद के बयान को बाद में दर्ज किया।

हमें ऑल इंडिया डेटा के बारे में बताइए: CJI

CJI ने रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा कि अमित आनंद के बयान के मुताबिक चार मई को रात में लोगों को प्रश्न पत्र रटवाने के लिए इकठ्ठा किया गया था। SG ने दूसरे बयान को बताते हुए कहा कि नीतीश कुमार मौके पर मौजूद था वो जिन लड़कों को लाया था और पांच मई को अमित द्वारा लाए गए दो और सिकंदर के छह लड़के को हॉस्टल ले जाया गया। य़ह स्कूल आशुतोष कुमार द्वारा किराया पर लिया गया था। जहां पांच मई को चिंटू के मोबाइल पर प्रश्न पत्र आया और लड़को को सुबह 10 बजे याद कराया गया। SG ने कहा कि चिंटू के बयान के मुताबिक पांच मई को सुबह 10 बजे सॉल्व पेपर मोबाइल पर मिला, उसके बाद प्रश्न पत्र छात्रों को प्रिंट निकालकर याद करने के लिए दिया गया। CJI ने कहा कि आप हमें ऑल इंडिया डेटा के बारे में बताइए जो आपने जारी किया गई। SG ने कहा कि हमने बिहार के सेंटर शहर और राज्य के छात्रों के सफलता रेशियो का अध्ययन किया है और इसकी तुलना 2022 और 2023 से की है और इसमें कोई असामान्यता नहीं है।

व्यापक पेपर लीक के सबूत नहीं: CJI

CJI ने कहा कि अनुराग यादव के बयान से लगता है कि उसे पेपर चार मई को मिल गया था फिर भी हमे देखना है कि पेपर लीक क्या पटना, हज़ारीबाग तक ही सीमित थी या लीक व्यापक स्तर पर हुआ था?। CJI ने कहा कि हमारे पास अभी तक कोई ऐसा सबूत नहीं है जिससे य़ह पता चले कि लीक इतनी व्यापक थी और पूरे देश में फैल गया था। सुनवाई के दौरान य़ह भी कहा गया कि अभी तक जो भी मामले आए है वह बिहार और हरियाणा मे एक जगह जबकि राजस्थान मे दो जगह पर ऐसे मामले आए। CJI ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि क्या पेपर लीक स्थानीय स्तर पर है और यह भी देखना होगा कि पेपर सुबह 9 बजे लीक हुआ और साढ़े दस बजे तक हल हो गया और अगर हम इस पर विश्वास नहीं करते हैं तो आपको हमें यह दिखाना होगा कि लीक हजारीबाग और पटना से भी आगे हुआ था। आप हमें बताएं कि पेपर लीक कितना व्यापक है CBI की तीसरी रिपोर्ट से हमें पता चला है कि प्रिंटिंग प्रेस कहाँ स्थित थी?।

जब SBI से पेपर आने थे, तो केनरा बैंक से पेपर कैसे आए?: CJI

CJI ने पूछा कि क्या सेंटर इंचार्ज को दोनों बैंकों से पेपर मिलते हैं? SG तुषार मेहता ने कहा कि किसी सिटी इंचार्ज को यह नहीं बताया जाता कि किस बैंक से पेपर लेना है?। CJI ने पूछा कि क्या बैंकों को इस बारे में जानकारी नहीं है। जब SBI को पेपर बांटने थे तो झज्जर इंचार्ज केनरा बैंक कैसे गए और पेपर कैसे लाए? तो क्या कैंडिडेट ने पूरी परीक्षा केनरा बैंक के पेपर में लिखी?। हुड्डा ने कहा कि तीन हजार से ज़्यादा छात्रों को केनरा बैंक के पेपर मिले। पूरे भारत में ऐसा आठ सेंटर पर हुआ है। CJI ने कहा कि झज्जर मे छात्रो को ग्रेस मार्क्स क्यों दिए गए? ऐसा तो नहीं है कि बीच में सही पेपर दे दिया गया। SG ने कहा कि झज्जर में छात्रों ने पूरा पेपर लिखा और कुछ केंद्रों में गलत पेपर भी वापस ले लिया गया था और SBI के पेपर दिए गए। SG ने कहा कि कुछ सेंटरों में छात्रों ने कैनरा बैंक के आधार पर पूरी परीक्षा दी है। झज्जर में तीन सेंटर थे। एक में कैनरा बैंक वाला पेपर दिया गया और छात्रों को कोई परेशानी नहीं हुई जबकि बाकी दो में गलती का एहसास होने पर पेपर बीच परीक्षा से वापस ले लिया गया और नया पेपर दिया गया। इस प्रकार छात्रों ने कहा कि उन्हें पूरा समय नहीं मिला और यह सच था।

अभ्यार्थियों को ग्रेस मार्क्स क्यों दिया गया?: CJI

CJI ने कहा कि फिर ग्रेस मार्क्स क्यों दिया गया?। SG ने कहा कि यह तय किया गया कि CLAT का एक निर्णय था जिसमें कहा गया था कि यदि छात्रों के पास कम समय है, तो ग्रेस मार्क्स दिए जाते हैं और फिर बाद में इसे रद्द कर दिया गया और फिर से परीक्षा आयोजित की गई। CJI ने पूछा कि ऐसे 1563 छात्र कहां से थे?। SG ने कहा कि ये सभी छात्र वहां से थे जहाँ भी समय की गड़बड़ी हुई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से नरेंद्र हुड्डा ने कहा कि जहां तक ​​लीक का सवाल है। संजीव मुखिया एक गैंगस्टर है,जिसकी गिरफ्तारी अभी बाकी है। इसके लिए राजस्थान से सॉल्वर बुलाए गए थे,व्हाट्सएप के जरिए इसका प्रसार हुआ। यह संभव नहीं है कि लीक सिर्फ पटना तक ही सीमित हो, यह पूरी तरह से सिस्टमेटिक फेल्योर है, इसमे परीक्षार्थी के पते का सत्यापन नहीं हुआ। CCTV कैमरे की निगरानी नहीं हुई। सवाई माधवपुर के बारे में उनके हलफनामे से इसकी पुष्टि होती है।

प्रश्नपत्र छह घंटे तक अपने पास रखे गए: याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ताओं के वकील नरेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि पेपर लीक कराने वालों ने प्रश्नपत्र छह घंटे तक अपने पास रखे। यदि अदालत पुनः नीट पर विचार नहीं कर रहा है तो कम से कम 164 के कट ऑफ वाले उन 13 लाख योग्य छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए कहा जाना चाहिए। इसके बाद याचिकाकर्ता की तरफ से वकील संजय हेगड़े दलील देते हुए कहा कि बेशक पेपर हजारीबाग से लीक हुआ है लेकिन इसे पटना में पकड़ा गया। आज हमें नहीं पता कि यह सब और कहां कहा से लीक हुआ, जांच रिपोर्ट कहती है कि कुछ संदेश करीब 100 लोगों तक पहुंचे।उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता कि लीकेज कितना बड़ा था। लीकेज का समय से कुछ हद तक य़ह निश्चित है कि यह पांच मई की सुबह नहीं हुआ, यह कम से कम चार मई की रात या उससे पहले ही हुआ था। हेगड़े ने कहा कि CBI की जांच सिर्फ पटना तक सीमित नहीं है बल्कि यह कई राज्यों को कवर कर रही है। CBI इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकीं हैं कि यह लीकेज स्थानीय स्तर पर हुआ था।

परीक्षा में 61 टॉपर निकले इसपर भरोसा नहीं किया जा सकता: याचिकाकर्ता

उन्होंने कहा कि NEET को योग्यता का एक पैमाना माना जाता है, अगर आप NEET के लिए योग्य हैं तो आप सिर्फ़ देश के सरकारी सीटों के लिए ही नहीं कई देश भी NEET को स्वीकार करते हैं, सवाल य़ह भी है कि 164 का कट-ऑफ पाने वाले 13 लाख छात्र क्या उन सभी का निष्पक्ष मानक के साथ मूल्यांकन किया गया है?। क्या हम कह सकते हैं कि सभी को उतने नंबर मिले जिनके वे हकदार थे?। एक प्रतियोगी परीक्षा में 61 टॉपर निकले इसपर भरोसा नहीं किया जा सकता। हेगड़े ने कहा कि जब आपको कैंसर का संदेह हो और परीक्षणअनिर्णायक हों, तो सबसे अच्छा उपाय है कि आप कीमोथेरेपी करवाएं। आप कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने का जोखिम नहीं उठा सकते। NTA लगातार इस बात से इनकार करता रहा कि कोई लीक हुआ है। एजेंसी ने बिहार पुलिस के साथ सहयोग नहीं किया। जब बिहार की EOU ने NTA को पत्र लिखा तो उन्होंने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।

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