बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानि SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ड्राफ्ट सूची की वैधता लंबित याचिकाओं के फैसले पर निर्भर करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से आधार और EPIC पर विचार करने का आग्रह किया है।जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वो हमारी शक्ति नहीं छीन सकते, अगर हमें कुछ भी ग़लत लगा तो हम उसे (ड्राफ्ट वोटर लिस्ट) पूरी तरह से ख़त्म कर देंगे। आप तैयार रहें और हमें दलील पेश करने की एक स्पष्ट समय-सीमा बताएं।
दरअसल, एक अगस्त को ड्राफ्ट पब्लिकेशन होना है। कोर्ट ने कहा कि आधार और मतदाता पहचान पत्र की अनुमति न देने से बड़े पैमाने पर लोगों का बहिष्कार हो सकता है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हमें राशन कार्ड को स्वीकार करने में दिक्कत है, लेकिन जहां तक वोटर आईडी की बात है वो तो फॉर्म पर पहले से ही प्रिंट है। आधार नंबर वोटर को भरना है, लेकिन कोर्ट का आदेश ही है कि आधार नागरिकता की पहचान का दस्तावेज नहीं है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई कल के लिए सुनवाई टाल दी है। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच कल सुबह 10: 30 बजे सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि वो बहस करने के लिए कोर्ट को समय बताए। कल सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई की रूप रेखा तय कर सकता है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से इनकार करने हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को SIR में आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड को शामिल करने पर विचार करने को कहा था, लेकिन चुनाव आयोग ने इन दस्तावेजों वैध दस्तावेज नहीं माना है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में विपक्ष की 9 राजनीतिक पार्टियों ने याचिका दाखिल की थी। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, एनसीपी की सुप्रिया सुले, सीपीआई के डी राजा, डीएमके, हरिंदर मलिक, शिवसेना UBT के अरविंद सावंत, JMM के सरफराज अहमद और CPI के दीपांकर भट्टाचार्य याचिकाकर्ता हैं।